




भटनेर पोस्ट डेस्क-
राजस्थान सरकार ने प्रदेश की प्रशासनिक और सांस्कृतिक पहचान में एक बड़ा बदलाव करते हुए खैरथल-तिजारा जिले का नाम बदलकर भर्तृहरि नगर कर दिया है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने इस प्रस्ताव को औपचारिक मंजूरी दे दी। यह जिला तत्कालीन गहलोत सरकार के समय बनाए गए 17 नए जिलों में शामिल था, लेकिन भाजपा सरकार के सत्ता में आने के बाद उनमें से 9 जिलों को समाप्त कर दिया गया था। अब नए नामकरण के साथ यह क्षेत्र एक नई ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान हासिल करेगा। राजा भर्तृहरि, उज्जैन के अमर नरेश, न केवल अपनी शौर्यगाथा के लिए बल्कि विद्वता, धर्मनिष्ठा और आध्यात्मिकता के लिए भी प्रसिद्ध हैं। वे महाराज गंधर्वसेन के पुत्र और सम्राट विक्रमादित्य के बड़े भाई थे। कहा जाता है कि राजपाट और वैभव छोड़कर उन्होंने संन्यास का मार्ग चुना और योग व तपस्या में जीवन व्यतीत किया।

भर्तृहरि की कहानियां इतिहास और लोककथाओं में समान रूप से जीवित हैं। कभी रानी पिंगला के प्रेम और वफादारी की परीक्षा की कथा, तो कभी चमत्कारी फल और विश्वासघात की मार्मिक दास्तान। एक प्रसंग में वे गोरखनाथ के शिष्य बने और 12 वर्षों तक कठोर तपस्या की। उज्जैन स्थित भर्तृहरि गुफा आज भी उनके तप का प्रतीक है। यहां बहती शिप्रा नदी, धूनी की गर्म राख और एक विशाल पत्थर पर पंजे का निशान उनके अलौकिक व्यक्तित्व की गवाही देता है। अलवर जिले के भर्तृहरि धाम में उनकी समाधि स्थित है, जहां सदियों से अखंड ज्योति और धूनी जल रही है। श्रद्धालु इसे उनके चमत्कारों का प्रत्यक्ष प्रमाण मानते हैं।

सरकार का मानना है कि यह नामकरण न केवल भर्तृहरि की स्मृति को अमर बनाएगा, बल्कि जिले की पहचान को सांस्कृतिक आधार भी देगा। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा, ‘राजा भर्तृहरि का नाम हमारे इतिहास और संस्कृति में अमर है। उनका जीवन त्याग, सत्य और धर्म का प्रतीक है। इस जिले के नामकरण से आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा मिलेगी।’

स्थानीय लोगों ने भी इस फैसले का स्वागत किया है। व्यापारी संघ अध्यक्ष रामनिवास अग्रवाल ने कहा, ‘यह केवल नाम बदलना नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ने का अवसर है। इससे पर्यटन और धार्मिक महत्व भी बढ़ेगा।’ विशेषज्ञों का मानना है कि नए नाम के साथ जिले में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए योजनाएं तैयार हो सकती हैं। भर्तृहरि धाम और आसपास के स्थलों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रचारित कर पर्यटन, होटल उद्योग और स्थानीय रोजगार में बढ़ोतरी की जा सकती है।



