




भटनेर पोस्ट डेस्क
हनुमानगढ़ जंक्शन स्टेशन रोड के हनुमान मंदिर में एक बार फिर श्रद्धा, उल्लास और भक्ति के संगम की तैयारी आकार ले रही है। अवसर है, गणेश महोत्सव 2025 का, जो इस वर्ष अपनी 16वीं कड़ी में पहले से अधिक भव्य, मंगलमय और जनसहभागिता से ओतप्रोत रूप में आयोजित होने जा रहा है। स्वर्णकार समाज समिति, मराठा मंडल एवं जन सहयोग के संयुक्त तत्वावधान में यह महोत्सव अपने सांस्कृतिक और धार्मिक रंगों से पूरे नगर को रंग देने को आतुर है। आयोजन समिति उपाध्यक्ष मनीष जांगिड़ बताते हैं कि 27 अगस्त को गणेश चतुर्थी के शुभ अवसर पर रेलवे स्टेशन रोड स्थित हनुमान मंदिर, हनुमानगढ़ जंक्शन में श्रीगणेश प्रतिमा की स्थापना की जाएगी। यही नहीं, पूरे 11 दिनों तक सुबह-शाम आरती और यजमानों द्वारा विधिवत पूजन का क्रम चलेगा। शंखनाद, मंत्रोच्चार और भक्ति-भाव के बीच श्रीगणेश भक्तों के मन-आंगन में आनंद की तरंगें गूंजेंगी। 5 सितंबर, शुक्रवार को प्रातः पूजन उपरांत भंडारे व लंगर प्रसाद का आयोजन होगा, जिसमें सभी श्रद्धालुओं से आग्रह किया गया है कि वे आकर प्रभु का प्रसाद ग्रहण करें। 6 सितंबर, शनिवार को प्रातः 10.15 बजे, नगर में भव्य शोभायात्रा निकाली जाएगी, जो हनुमान मंदिर से प्रारंभ होकर शहर के मुख्य मार्गों से होती हुई गंगानगर बाईपास नहर तक पहुंचेगी, जहां श्रीगणेश प्रतिमा का विधिवत विसर्जन किया जाएगा। शोभायात्रा में आकर्षक झांकियां, भक्तों की टोलियां, ढोल-नगाड़े, वादन और नर्तन इस मंगल यात्रा को अविस्मरणीय बना देंगे।

इस आयोजन की रूपरेखा तय करने के लिए स्वर्णकार समाज समिति की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें समाज के प्रमुख पदाधिकारियों एवं गणमान्य सदस्यों की गरिमामयी उपस्थिति रही। बैठक में समिति के अध्यक्ष बबलू सोनी, संरक्षकगण सुभाष सोनी एवं सुरेंद्र सोनी, उपाध्यक्ष मनीष जांगिड़, सचिव दीपक सोनी, कोषाध्यक्ष अनिल मराठा, सहसचिव बिट्टू सोनी, प्रचार मंत्री अमन सोनी सहित अनेक समाजसेवी सदस्य उपस्थित रहे, जिनमें चेतराम सोनी, धर्मपाल सोनी, देवीलाल सोनी, ध्रुव सोनी, प्रशांत सोनी, सम्मी सोनी एवं मुन्ना बंगाली विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं। अध्यक्ष बबलू सोनी के मुताबिक, यह महोत्सव केवल पूजा-पाठ का अवसर नहीं, बल्कि नगरवासियों के बीच एकता, संस्कृति और परंपरा के पुनर्संवर्धन का सेतु है। ‘गणपति बप्पा मोरया’ का जयघोष नगर की गलियों में गूंजने को तैयार है, एक ऐसी ध्वनि, जो केवल कानों से नहीं, हृदय से सुनी जाती है।



