






भटनेर पोस्ट ब्यूरो.
भारतीय न्यायपालिका की संवैधानिक प्रक्रिया, सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की अनुशंसा और केंद्र सरकार की अंतिम मंजूरी के बाद अधिवक्ता गौतम अश्विनी को बॉम्बे हाईकोर्ट का न्यायाधीश नियुक्त किया गया है। अश्विनी राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता अशोक गहलोत के दामाद हैं। उन्होंने पिछले दो दशकों से अधिक समय तक बॉम्बे हाईकोर्ट में वकालत की है। उनके कानूनी करियर की पहचान एक संतुलित, गहन अध्ययन वाले और न्यायप्रिय अधिवक्ता के रूप में रही है। वे कॉरपोरेट, संवैधानिक और आपराधिक मामलों में विशेषज्ञता रखते हैं और अदालत में उनकी प्रस्तुतियाँ हमेशा तार्किक गहराई और कानूनी सूझबूझ का परिचायक रही हैं। गौतम अश्विनी, अशोक गहलोत की बेटी सोनिया गहलोत के पति हैं। यह गहलोत परिवार के लिए एक ऐतिहासिक क्षण है, क्योंकि पहली बार उनके किसी सदस्य ने न्यायिक क्षेत्र में उच्चतम स्तर पर पद ग्रहण किया है।
बॉम्बे हाईकोर्ट द्वारा की गई अनुशंसा के बाद सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने उनकी नियुक्ति को मंजूरी दी थी। हालांकि प्रक्रिया में लगभग एक वर्ष का समय लगा। कॉलेजियम की सिफारिश के बाद केंद्र सरकार ने फाइलों की गहन पड़ताल की और अंततः अधिसूचना जारी कर नियुक्ति को अंतिम रूप दिया।
यह उल्लेखनीय है कि अशोक गहलोत स्वयं कानून के छात्र रह चुके हैं और युवावस्था में वकालत के क्षेत्र से जुड़ाव के बाद उन्होंने राजनीतिक जीवन में प्रवेश किया। वे तीन बार राजस्थान के मुख्यमंत्री रहे और अपने सौम्य, विचारशील व्यक्तित्व के लिए देशभर में जाने जाते हैं।
माना जा रहा है कि गौतम अश्विनी की यह नियुक्ति न केवल उनके पेशेवर कौशल का सम्मान है, बल्कि यह न्यायपालिका में प्रतिभा आधारित चयन प्रक्रिया की भी मिसाल है, जिसमें पारिवारिक पहचान से अधिक महत्व योग्यता और अनुभव को दिया जाता है। कानूनी जगत और राजनीतिक हलकों में इस नियुक्ति को सकारात्मक रूप से देखा जा रहा है। कई वरिष्ठ वकीलों और न्यायाधीशों ने उम्मीद जताई है कि गौतम अश्विनी अपने अनुभव और निष्पक्ष दृष्टिकोण से न्यायपालिका को और अधिक सशक्त बनाएंगे।




