





भटनेर पोस्ट पॉलिटिकल डेस्क.
राजस्थान की राजनीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव की आहट सुनाई दे रही है। कांग्रेस पार्टी अब प्रदेश में पंचायतीराज और शहरी निकायों के आगामी चुनावों में युवाओं को प्राथमिकता देने की रणनीति के तहत मैदान में उतरेगी। पार्टी ने स्पष्ट कर दिया है कि इन चुनावों में 50 प्रतिशत टिकट 50 साल से कम उम्र के युवाओं को दिए जाएंगे। यह बदलाव केवल चेहरों का नहीं, बल्कि सोच और नेतृत्व की दिशा का प्रतीक माना जा रहा है। कांग्रेस हाईकमान के निर्देश पर राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने इस निर्णय को लागू करने की दिशा में कदम बढ़ा दिए हैं। टिकट वितरण की पारंपरिक व्यवस्था में भी व्यापक फेरबदल की तैयारी है। अब उम्मीदवारों का चयन केवल प्रदेश स्तरीय नेताओं के निर्णय पर आधारित नहीं होगा, बल्कि जिला और ब्लॉक स्तर के नेताओं की राय को भी समान महत्व मिलेगा। इससे स्थानीय स्तर पर जनाधार रखने वाले कार्यकर्ताओं और उभरते नेताओं को आगे आने का मौका मिलेगा।
चिंतन शिविर से शुरू हुआ बदलाव
उदयपुर में 2022 में आयोजित कांग्रेस के राष्ट्रीय चिंतन शिविर में जारी ‘उदयपुर घोषणा पत्र’ में यह वादा किया गया था कि पार्टी संगठन में युवाओं को 50 प्रतिशत भागीदारी दी जाएगी। अब इस वादे को जमीनी हकीकत में बदलने का वक्त आ गया है। राजस्थान कांग्रेस ने घोषणा पत्र के उस वादे को अमलीजामा पहनाते हुए स्थानीय निकायों और पंचायतीराज संस्थाओं के चुनावों में इसे लागू करने का ऐलान कर दिया है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने साफ किया कि टिकट वितरण की प्रक्रिया में अब जिलाध्यक्ष, ब्लॉक अध्यक्ष और मंडल अध्यक्षों की राय को प्रमुखता दी जाएगी। उनका कहना है कि “हम स्थानीय चुनावों में 50 प्रतिशत टिकट 50 साल से कम उम्र के युवाओं को देंगे। हमें कांग्रेस हाईकमान से स्पष्ट निर्देश मिले हैं, जिनकी पालना की जाएगी।”

पुराने फॉर्मूले को कहेंगे अलविदा
अब तक टिकट वितरण की प्रक्रिया में प्रदेश चुनाव समिति की भूमिका प्रमुख रहती थी, और फैसले कुछ गिने-चुने वरिष्ठ नेताओं तक सीमित रहते थे। यह प्रणाली कई बार असंतोष और गुटबाजी को जन्म देती रही है। लेकिन अब कांग्रेस स्थानीय स्तर पर फीडबैक आधारित प्रणाली अपनाकर संगठनात्मक मजबूती की दिशा में बढ़ना चाहती है। ब्लॉक और जिला स्तरीय नेतृत्व को ज़मीनी हकीकत से सबसे नज़दीकी समझ होती है, और उनकी राय उम्मीदवारों के चयन में बेहद उपयोगी हो सकती है।
नए चेहरों की होगी एंट्री
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि 50 साल से कम उम्र के नेताओं को टिकट देने का फैसला कांग्रेस के लिए एक साहसिक और दूरदर्शी कदम हो सकता है। इससे पार्टी को युवाओं के बीच न केवल नई ऊर्जा मिलेगी बल्कि नेतृत्व में पीढ़ीगत परिवर्तन की दिशा भी तय होगी। नगरपालिका अध्यक्ष, नगर परिषद सभापति, मेयर, जिला प्रमुख, प्रधान, पंचायत समिति सदस्य, और पार्षद जैसे पदों पर युवाओं की भागीदारी बढ़ेगी। हालांकि, सरपंच और वार्ड पंच के चुनाव अभी राजनीतिक दलों के सिंबल पर नहीं लड़े जाते हैं, लेकिन बाकी सभी पदों पर कांग्रेस की युवा प्राथमिकता स्पष्ट दिखाई देगी।

वन स्टेट-वन इलेक्शन की पृष्ठभूमि में चुनावी तैयारियां
राजस्थान सरकार पहले ही ‘वन स्टेट-वन इलेक्शन’ की नीति के तहत पंचायतीराज और शहरी निकायों के चुनाव एक साथ कराने की घोषणा कर चुकी है। राज्य की लगभग 7000 पंचायतों का कार्यकाल पूरा हो चुका है, और इनमें प्रशासक लगाए जा चुके हैं। शहरी निकायों में भी प्रशासक नियुक्त हैं। संभावना है कि निकाय चुनाव इस साल के अंत तक और पंचायतीराज चुनाव अगले साल तक कराए जाएंगे। इस बीच, चुनावों में देरी को लेकर हाईकोर्ट में याचिका भी लंबित है, जिससे स्पष्ट संकेत मिलते हैं कि चुनावी प्रक्रियाएं कानूनी और संवैधानिक बाधाओं के दायरे में भी हैं।
युवाओं को तैयार करने का अभियान
कांग्रेस ने सिर्फ टिकट देने की घोषणा नहीं की है, बल्कि इसके लिए ज़मीनी स्तर पर तैयारी भी शुरू कर दी गई है। प्रदेश के कांग्रेस नेताओं को निर्देश दिए गए हैं कि वे ग्राउंड लेवल पर नए युवाओं की पहचान करें और उन्हें चुनावी राजनीति के लिए प्रशिक्षित करें। यह पहल कांग्रेस की दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा है, जिसमें संगठन को युवा नेतृत्व के साथ अधिक जीवंत और प्रासंगिक बनाना प्राथमिकता है।
विधानसभा और लोकसभा पर भी पड़ेगा असर
हालांकि यह योजना अभी स्थानीय निकाय और पंचायत चुनावों के लिए लागू की जा रही है, लेकिन कांग्रेस नेतृत्व ने संकेत दिए हैं कि इसे भविष्य में विधानसभा और लोकसभा चुनावों में भी अपनाया जाएगा। यानी यह प्रयोग नहीं, बल्कि एक दीर्घकालिक परिवर्तन की शुरुआत है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि कांग्रेस इस योजना को गंभीरता और निष्पक्षता से लागू करती है, तो यह राज्य की राजनीति में युवा नेतृत्व का नया अध्याय खोल सकती है। वहीं, बीजेपी सहित अन्य दलों पर भी इसका दबाव बनेगा कि वे भी युवाओं को अधिक प्रतिनिधित्व दें। इससे राज्य में राजनीति का मिजाज बदलेगा और नीति निर्माण में युवाओं की आवाज अधिक मुखर होगी।
इस फैसले से कांग्रेस न केवल संगठनात्मक मजबूती हासिल कर सकती है, बल्कि आने वाले चुनावों में जनाधार बढ़ाने का अवसर भी पा सकती है। यह देखना दिलचस्प होगा कि कांग्रेस इस घोषणा को धरातल पर कितनी मजबूती से उतार पाती है। फिलहाल इतना तय है कि राजस्थान की राजनीति में कांग्रेस युवाओं को केंद्र में लाकर एक नई पटकथा लिखने की तैयारी में है।




