




भटनेर पोस्ट एग्रीकल्चर डेस्क.
हनुमानगढ़ जिला मुख्यालय के पास स्थित श्री खुशाल दास विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय मधुमक्खी बोर्ड द्वारा वितपोषित एकीकृत मधुमक्खी पालन विकास केन्द्र स्वीकृत किया गया है। कलक्टर कानाराम, सुभाषचन्द्र डूडी डिप्टी डायरेक्टर, रमेश चन्द्र बरोला डिप्टी डायरेक्टर होर्टीकल्चर, जय नारायण बैनीवाल रिटायर्ड डिप्टी डायरेक्टर एग्रीकल्चर, राजेन्द्र बैनीवाल कृषि अनुसंधान अधिकारी ने मधुमक्खी पालन प्रशिक्षण एवं शहद प्रोसेसिंग केन्द्र का शुभारंभ किया। अतिथियों का श्री गुरू गोबिन्द सिंह चैरिटेबल ट्रस्ट के अध्यक्ष बाबूलाल जुनेजा, रिटायर्ड आई.जी. गिरीश चावला, एसकेडीयू के मैनेजिंग डायरेक्टर दिनेश जुनेजा ने पुष्प गुच्छ भेंट कर स्वागत अभिनंदन किया। इस अवसर पर मधुमक्खी पालन प्रशिक्षण केन्द्र से संबंधित पुस्तिका का विमोचन किया गया।
जिला कलेक्टर कानाराम ने कहा कि यह हम सब के लिए गर्व की बात है कि पश्चिमी राजस्थान का पहला एकीकृत मधुमक्खी पालन विकास केन्द्र एसकेडीयू को मिला है। हनुमानगढ़ व श्रीगंगानगर जिले के मधुमक्खी पालकों और नये मधुमक्खी पालकों के साथ.साथ जिन मधुमक्खी पालकों को पर्याप्त और उचित मूल्य का लाभ नहीं मिल पा रहा है उनके लिए यह केंद्र वरदान साबित होगा। जिन किसानों की कृषि आय कम है वे कृषि के साथ साथ इस केंद्र के माध्यम से मधुमक्खी पालन का प्रशिक्षण प्राप्त कर अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत कर पाएंगे।

पूर्व डिप्टी डायरेक्टर जय नारायण बेनीवाल ने कहा कि मधुमक्खी केवल शहद उत्पादन तक ही सीमित नहीं है। पूर्व आईजी गिरीश चावला ने कहा कि पश्चिमी राजस्थान में हम एक नयी क्रांति का सूत्रपात करने जा रहे हैं। अत्यधिक खर्चों के चलते किसानों की आय बढाने के उद्देश्य से इस केंद्र का शुभारंभ हुआ है। राष्ट्रीय मधुमक्खी बोड जो कि भारत सरकार द्वारा हमें आवंटित किया गया है यह बहुत ही हर्ष का विषय है।
श्री गुरू गोबिन्द सिंह चैरिटेबल ट्रस्ट के अध्यक्ष बाबूलाल जुनेजा ने कहा कि विश्वविद्यालय का उद्देश्य अपने क्षेत्र का विकास करना है, केवल डिग्री देना नहीं। जुनेजा ने कृषक एवं मधुमक्खी पालकों से आह्वान किया कि राष्ट्रीय मधुमक्खी बोर्ड भारत सरकार द्वारा अनुमोदित इस सात दिवसीय मधुमक्खी प्रशिक्षण शिविर के माध्यम से नयी व उन्नत तकनीकों का उपयोग कर अपने ज्ञान एवं आय में वृद्धि प्राप्त कर अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें।

एसकेडियू के मैनेजिंग डायरेक्टर दिनेश जुनेजा ने कहा कि राष्ट्रीय मधुमक्खी बोर्ड द्वारा वितपोषित एकीकृत मधुमक्खी पालन विकास केन्द्र हमें जिला कलेक्टर के मार्गदर्शन और प्रयासों से मिला है। जो पूरे प्रदेश के लिए गर्व की बात है। केंद्र के शुरूआती दौर में बहुत प्रकार की चुनौतियां आएगी, यह स्वाभाविक है। हम हर प्रकार की समस्या के समाधान के लिए प्रयासरत रहेंगे।
प्रोजेक्ट इंचार्ज डॉ. मंगलाराम बाजिया ने कहा कि राष्ट्रीय मधुमक्खी बोर्ड द्वारा वितपोषित एकीकृत मधुमक्खी पालन विकास केन्द की स्थापना के पश्चात् सात दिवसीय प्रशिक्षण के दौरान मधुमक्खी राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन होगा, गुणवत्तापूर्ण रानी मधुमक्खी स्टॉक केंद्र की स्थापना, मधुमक्खी उपकरण निर्माण ईकाई की स्थापना, हनी प्रोसेसिंग ईकाई की स्थापना, फसलों में मधुमक्खियों द्वारा परागन कराने के लिए कस्टम हायरिंग केंद्र की स्थापना, शहद और मधुमक्खी छत्ते के उत्पादों के लिए कोल्ड स्टोरेज इकाई की स्थापना की जायेगी। कार्यक्रम के सफल आयोजन में डॉ. विजय दुगेसर, डॉ. अभिनव कुमार, डॉ. अंकित कुमार, डॉ. विकास विश्नोई, डॉ. ममता, अमिता, राहुल, लोकेन्द्र आदि का सहयोग रहा। मंच संचालन सिमरन बलाना व आर्ची भटेजा ने किया।



